30 best dikhawa shayari

dikhawa shayari

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1- मदद वही होती है जो चुप-चाप की जाए, जो सभी को बताकर की जाए उसे दिखावा कहते हैं।

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2- झूठ को सच साबित करने के लिए दावा मत किया करो, चाहते नहीं हो अगर तो चाहने का दिखावा मत किया करो।

dikhawa shayari in hindi

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3- ये जो तुमने अपना मोहोब्बत भरा दिल और मासूम चेहरा दिखाया था, वो सब झूठ था वो सब दिखावा था।

दिखावा शायरी इन हिंदी

4- जिन रिश्तों में सच साबित करने के लिए गवाही देनी पड़े, उन रिश्तों से गन्दा और कोई रिश्ता नहीं जहाँ हर लफ्ज़ की सफाई देनी पड़े।

झूठे लोग शायरी

5- बस बहार से मुस्कुराने का नाटक करता हूँ अंदर से पूरा टूटा हुआ हूँ मैं, किसी और से नाराज़ होकर भला क्या करूंगा मैं तो खुद से ही रूठा हुआ हूँ।

दिखावे के रिश्ते शायरी

6- मुझे बीमार कर वो खुद खाँसा करते है, मरहम के नाम पर झूठे दवा-ऐ-दिलासा करते हैं।

मक्कारी पर शायरी

मक्कारी पर शायरी

7- आते हैं नज़दीक चुपके से सांप सहम कर, दुश्मनी के ऊपर दोस्ती के नकाब पहन कर।

चालाक लोग शायरी

8- ये नकाब पहन कर मेरे दिल के दरवाज़े पर आया मत करो, दुश्मन हो तो खुल कर कहो मुझे अपना दोस्त बताया मत करो।

मोहब्बत का दिखावा शायरी

9- दोस्त तुम अभिनेता क्यों नहीं बन जाते, वाकई नाटक बहुत अच्छा कर लेते हो।

शरीफ shayari

10- पूरी छुरी नहीं चाहिए नौक ही काफी है चुभाने को, जब गिरे हम कामियाबी के गद्दी से नीचे तो लंगड़े दौड़े हमारा फायदा उठाने को।

11- दिखावा भर है वरना कहाँ अपना मानते हैं लोग, ज़रा सा सच कहो तो कितना बुरा मानते हैं लोग।

12- निभाते दुश्मनी है पर खुद को हमारा सनम बताते हैं, लगाते नमक है पर हमे कम्बख्त मरहम बताते हैं।

13- हमे तो दोस्तों ने ज़िन्दगी में बस यही सबक सिखाया है, ये दोस्ती की बाते सब झूठी है सब दिखावा है।

14- इश्क़ को सरे-आम बदनाम कर, अब कपड़े उतारते हैं जनाब मोहोब्बत के नाम पर।

दिखावे वाली शायरी

15- ये बोझ धोकेबाज़ी का उठाया नहीं जाता, पहला धोका तो पहले धोका होता है भूले से भी भुलाया नहीं जाता।

16- वादा मत किया कर दावा मत किया कर, इश्क़ निभाया ना जाए तो दिखावा मत किया कर।

17- ऐसा नहीं है की मैं तुझसे मोहोब्बत नहीं करता, फ़र्क़ बस इतना है की मैं दिखावा नहीं करता।

18- मोहोब्बत जो हकीकत में करते है दिखावा नहीं करते, जो चाहने का दिखावा करते हैं वो निभाया नहीं करते।

19- हर इंसान में इतना दिखावा है जनाब जो खुद को एक दफा आईने में देख ले तो खुद को देख नहीं पाएगा।

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20- मखमल के पाजामे में फटी जेब लेकर, घर पर खाने को रोटी नहीं चलते है ज़माने में सेब लेकर।

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21- ये इंसानी दुनिया से तो खुदा तेरी कुदरत ही अच्छी थी, ये दिखावे की मोहोब्बत से तो रूबरू नफरत की अच्छी थी।

22- जहाँ सिर्फ तू पिसेगा ये दुनिया वो खाली ओखली है, बहार से दिखती होगी लोगों से भरी अंदर से ये दुनिया खोखली है।

23- अब भूल से भी ना मुझे तंग कर दिखाना, छोड़ दिया है मैंने अच्छा बन कर दिखाना।

24- ऐ खुदा क्यों तुम इन गंवारों को समझा क्यों नहीं देते, जो निजी मामलों में दखल देते है वो मदद नहीं देते।

25- हम दर्द में होने का शोर ही नहीं करते, बस इसलिए हमारे दर्द पर कोई गौर ही नहीं करते।

26- यूँ दिखावा ना कर मेरे सामने शराफत का, मैं बस खामोश हूँ नासमझ नहीं।

27- वक़्त हम दोनों ने ही उस रिश्ते में बिताया था, फ़र्क़ बस इतना था हमारा प्यार सच्चा था उनका दिखावा था।

28- जिस नज़ाकत से लहरे पैरों को छूती है, यकीन नहीं होता इन्होने कभी कश्तियाँ दुबई होंगी।

29- रिश्ता अब दुनिया से दुनिया की ही तरह निभाना पड़ता है, अंदर से कुछ और बहार से कुछ और बन कर दिखाना पड़ता है।

30- अगर हो कोई तो तेरी जैसी नसल हो, दिखावा भी इस क़दर करती हो जैसे असल हो।

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